सॉल्यूशन्स जर्नलिज़्म क्यों ज़रूरी है? (Why Solutions Journalism)

पाठक ऐसी कहानियों की माँग कर रहे हैं जो केवल नकारात्मकता 

और समस्याओं तक सीमित न हों। 

सिर्फ समस्याओं की रिपोर्टिंग उन्हें असहाय और हतोत्साहित महसूस 

करा सकती है —

 जैसे कि उनके समुदाय या समाज में भाग लेने का कोई अर्थ ही नहीं है।

अगर हम उन्हें ऐसे कार्यक्रमों की कहानियाँ दिखाएँ जो 

वास्तव में मदद कर रहे हैं, 

और ऐसी तकनीकों की जानकारी दें जो किसी महत्वपूर्ण समस्या को 

हल करने में कारगर दिखती हैं — 

तो यह पाठकों के लिए सबसे उपयोगी होता है।”

Liz Goodwin  portrait
Liz Goodwin
Yahoo! News

पत्रकारिता में बदलाव लाने की जो परंपरागत सोच रही हैवह यह मानती है कि सामाजिक समस्याओं की ओर उजागर करना ही सुधार की प्रक्रिया शुरू कर देगा। पत्रकार अक्सर व्हिसलब्लोअर की भूमिका निभाते हैंगलत को उजागर करते हैंलेकिन इससे आगे उनका कोई सक्रिय योगदान नहीं दिखता है।

हम मानते हैं कि यह परिवर्तन का सिद्धांत अपरिपक्व है।

केवल यह बताना कि क्या गलत हो रहा है और फिर उम्मीद करना कि समाज बेहतर क़ानून बनाएगा या जवाबदेही तय करेगायह सोच पत्रकारों के लिए सही नहीं है।
दुनिया की समस्याएँ आज बहुत अधिक जटिल और तेज़ी से बदल रही है I
ऐसे में ज़रूरी है कि लोग उन समाधान के विश्वसनीय उदाहरणों के बारे में जानें जो समस्याओं से निपटने के लिए अपनाए जा रहे हैं — ताकि वे सक्षमसमझदार और सक्रिय नागरिक बन सकें जो समाज को बेहतर दिशा में ले जा सकें।

इस संदर्भ मेंपत्रकारिता को अपनी पारंपरिक भूमिका से आगे बढ़ना होगा — और गहराई से जड़वत/मुश्किल समस्याओं के अनुकूल और ठोस समाधानों पर रोशनी डालनी होगी।

तो फिर आप समाधान पत्रकारिता क्यों नहीं करेंगे?

 

यह तो बस अच्छी पत्रकारिता है।

आपने शायद गौर किया होगा कि हमारा टैगलाइन हैपूरी कहानी
हम मानते हैं कि सॉल्यूशन्स जर्नलिज़्म पारंपरिक पत्रकारिता को और अधिक सटीक और संपूर्ण बनाता है।
जो पत्रकारिता सामाजिक समस्याओं के समाधान की रिपोर्टिंग नहीं करतीवह एक अधूरी और पक्षपाती तस्वीर प्रस्तुत करती है — जो वास्तव में समाज को नुकसान पहुँचा सकती है।

जब मीडिया बार-बार समस्याओं को दिखाता हैलेकिन उनके जवाब में हो रही कोशिशों को नज़रअंदाज़ करता हैतो वह यह झूठा संकेत देता है कि लोगों ने कभी समाधान की कोशिश ही नहीं की — या उन्हें नहीं पता कि क्या बेहतर किया जा सकता है।

 

यह पाठकों जुड़ाव बढ़ाता है।

सॉल्यूशन्स कहानियाँ अक्सरहाउडनइट्स” (Howdunnits) शैली में रची जाती हैं — जैसे टीवी शो CSI या Houseजहाँ किसी ने ऐसा परिणाम हासिल किया जो खबर बनने लायक थाऔर फिर सवाल उठता हैउसने ऐसा क्या किया जो औरों ने नहीं किया?
यदि इस कहानी शैली को अच्छे से प्रस्तुत किया जाएतो यह पाठकों की दिलचस्पी को  केवल खींच सकती है बल्कि उसे बनाए भी रखती है।

सॉल्यूशन्स जर्नलिज़्म की कहानियाँ सोशल मीडिया पर ज़्यादा साझा की जाती हैं — आंशिक रूप से इसलिए क्योंकि ये पाठकों को सशक्त महसूस कराती हैंउन्हें उदासीन या निराश नहीं बनातींऔर  ही समस्या को लेकर नकारात्मक या तटस्थ रवैया अपनाने देती हैं।

इस बात की पुष्टि सामाजिक विज्ञान से जुड़े शोधों में भी हुई है — जिनमें Engaging News Project द्वारा समर्थित अध्ययन शामिल हैं।

 

यह असर डाल सकती है।

जब पत्रकार यह दिखाते हैं कि अलग-अलग संस्थाएँ किसी समस्या से कैसे निपटती हैंतो सॉल्यूशन्स जर्नलिज़्म सार्वजनिक विमर्श को आगे बढ़ा सकता है।
"उसने कहाउसने कहाजैसे शोरगुल वाले बहसों की बजायहमने कई उदाहरणों में पाया है कि समाधान-केंद्रित पत्रकारिता ज़्यादा रचनात्मक और कम विभाजनकारी संवाद की ओर ले जाती है।

लोग सिर्फ इसलिए नहीं बदलते कि आपने उन्हें उनकी समस्याएँ दिखा दींवे बदलाव के लिए उदाहरण चाहते हैं।
ठीक वैसे ही जैसे व्यक्ति को प्रभावी परिवर्तन प्रबंधन चाहिए होता हैसमाज को भी ज़रूरत होती है।