मैं कैसे जानूँ कि यह सॉल्यूशन्स जर्नलिज़्म नहीं है? (How do I know it's NOT Solutions Journalism)

मुझे नहीं लगता कि लोगों की असफलताओं को विरोधाभास के साथ रखना और बार-बार उसी पर चोट करते रहना... हमेशा सबसे प्रभावी तरीका होता है बदलाव लाने का।

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Claudia Rowe
The Seattle Times

यह समझाने के लिए कि सॉल्यूशन्स जर्नलिज़्म वास्तव में क्या है, इसके लिए हमें कुछ उदाहरणों के साथ यह समझना ज़रूरी है कि सॉल्यूशन्स जर्नलिज़्म क्या नहीं है। आइए समझते हैं ऐसे सात प्रकार के सॉल्यूशन्स जर्नलिज़्म, जो सही मायने में सॉल्यूशन्स जर्नलिज़्म है ही नहीं, जिन्हें हम सभी ने पहले मीडिया में देखा है।
आइए देखते हैं सॉल्यूशन्स जर्नलिज़्म के नकली प्रारूप:

 

व्यक्तिकेंद्रित प्रशंसा

ये वे कहानियाँ होती हैं जो किसी व्यक्ति को केंद्र में रखकर उसकी प्रशंसा करती हैं — लेकिन अक्सर यह बताए बिना कि वह व्यक्ति किस विचार या समाधान का प्रतिनिधित्व करता है।
ऐसी रिपोर्टिंग मेंकिसी दृष्टिकोण या समाधान की उपयोगिता और सीमाओं पर चर्चा करने के बजायलेख केवल इस बात पर केंद्रित हो जाता है कि उस व्यक्ति ने दुनिया को बचाने के लिए अपनी ऊँची तनख्वाह वाली नौकरी छोड़ दी।

एकमात्र समाधान की धारणा

ये कहानियाँ अक्सर टेक्नोलॉजी और नवाचार से जुड़ी रिपोर्टिंग में देखने को मिलती हैं।
इनमें नए गैजेट्स या तकनीकी समाधानों का ऐसा वर्णन किया जाता है मानो वे हर समस्या का "जीवनरक्षक" समाधान हों।
ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि कई बार धन (पैसा) को भी ऐसे ही "जादुई समाधान" के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।

 

मित्रवत पक्षपात 

आप इस प्रकार कीछल-कथा’ को अक्सर तब पहचान सकते हैं जब पूरी रिपोर्टिंग में केवल उसी संस्था की आवाज़ प्रमुख होती हैजिसकी प्रोफाइल बनाई जा रही है।
यह “Silver Bullet” जैसी कहानियों की तरह होती हैजहाँयकीनन कुछ शर्तों के साथ’ (to be sure) जैसी कोई आलोचनात्मक या संतुलित पैराग्राफ मौजूद नहीं होता।
अंततःयह रिपोर्ट अक्सर एक छिपे हुए पीआर (जनसंपर्कलेख की तरह लगती है।

 

कल्पनात्मक समाधान-केंद्रित लेखन 

राय आधारित पत्रकारिता (Opinion Journalism) समाधान तलाश सकती हैबशर्ते उसमें वास्तविक रिपोर्टिंग होयानी ऐसी प्रतिक्रियाएं जो पहले से मौजूद हैंऔर उनके परिणाम भी सामने लाए गए हों।
लेकिन "थिंक टैंक पत्रकारिताउन लेखों को कहा जाता है जो ऐसे समाधान प्रस्तुत करते हैं जो अभी अस्तित्व में ही नहीं हैं

 

तात्कालिक भावनात्मक अपील वाली पत्रकारिता

जब लोग 'सॉल्यूशन्स जर्नलिज़्मशब्द पढ़ते हैंतो कई बार उन्हें लगता है कि हम ऐसी रिपोर्टें प्रचारित कर रहे हैं जो पाठक से अंत में कोई बटन क्लिक करवाकर किसी अभियान कोडॉलर दान करने के लिए कहती हैं।
ऐसी कहानियाँ अक्सर एक भावनात्मक अपील के साथ शुरू होती हैं और फिर किसी खास कारण के लिए समर्थन माँगती हैं — यह दिखाते हुए कि यही उस मुद्दे कासमाधान” है।

 

औपचारिकता में जोड़ा गया समाधान

यह उस समस्या-केंद्रित कहानी का अंतिम पैराग्राफ या साउंडबाइट होता हैजिसमें समाधान की कोशिशों का केवल औपचारिक रूप से ज़िक्र किया जाता है।
ऐसी रिपोर्टों में समाधान को गंभीरता से नहीं परखा जाता — बल्कि उसे चलते-चलते या याद आने पर जोड़ दिया गया लगता है।

 

भावनात्मक लेकिन सतही कहानी

इस तरह की पत्रकारिता हल्की-फुल्की और अक्सर एक बार की घटना जैसी होती है। यह आमतौर पर शाम की खबरों के अंत में या त्योहारों के समय दिखाई देती है — जैसे किसी बच्चे का नींबू पानी का स्टॉल लगानाया किसी व्यक्ति द्वारा अपने पालतू सूअर के लिए व्हीलचेयर बनाना (जिसका नाम विडंबनापूर्ण रूप सेक्रिस पीबेकन” रखा गया है)
ऐसी कहानियाँ दर्शकों को यह तो बताती हैं कि दुनिया में अच्छे लोग हैं जो प्यारे काम कर रहे हैंलेकिन वे उन संरचनात्मक समस्याओं तक नहीं पहुँचतींजिन्हें हम समाधान पत्रकारिता का लक्ष्य मानते हैं I